Tuesday, 6 February 2018

अब गौमूत्र का उपयोग घातक बीमारियों के इलाज में करेगी उत्तर प्रदेश सरकार

Monday, February 5, 2018

अब गौमूत्र का उपयोग घातक बीमारियों के इलाज में करेगी उत्तर प्रदेश सरकार

फर्श क्लीनर बनाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब गौमूत्र से दवाएं बनाने की तयारी में लग गई है । आयुर्वेद विभाग के निदेशक आर आर चौधरी ने बताया कि उनके विभाग ने गौमूत्र का प्रयोग करके ८ दवाएं बनाई हैं, जो लीवर के रोग, जोडों के दर्द व रोग प्रतिरोधक दवाएं बनाने में काम आएंगी । प्रदेश में आयुर्वेद विभाग की दो फार्मेसी हैं, एक पीलीभीत में दूसरी लखनऊ में । इन दोनों जगहों पर कुछ निजी इकाइयाें के साथ गौमूत्र, गाय के घी व दूध से दवाएं तैयार की जा रही हैं ।
प्रदेश में बांदा, झांसी, मुज़फ्फरनगर, इलाहाबाद, वाराणसी, बरेली, लखनऊ व पीलीभीत में कुल ८ मेडिकल कॉलेज हैं । इन मेडिकल कॉलेजों में गोमूत्र व गाय के अन्य उत्पादों से बनी दवाइयां सप्लाई की जाती हैं ।
श्री चौधरी ने बताया कि गौमूत्र आयुर्वेद का महत्त्वपूर्ण अंग है । हमारा प्रयास है कि हम गौमूत्र व गाय से मिलने वाले अन्य उत्पादों जैसे घी, दूध इत्यादि का प्रयोग करके कई और तरह की दवाइयां बनाई जाएं ।
उन्होंने बताया कि इसमें समस्या ये है कि अभी तक प्रदेश में केवल दो फॉर्मेसी हैं, इसलिए अभी इन दवाओं का उत्पादन कम हो रहा है । हालांकि निजी क्षेत्र में कई कंपनियां गौमूत्र का प्रयोग करके दवाएं बनाने में लगी हैं, जो कि इन मेडिकल कॉलेजों को सप्लाई किया जाता है । विभाग अभी कुछ नई फॉर्मेसी खोलने वाला है और मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट व एमडी कार्यक्रम शुरू करेगा ।

स्त्रोत : न्युज १८

Beain gochalan tihidi khorda

SAMAJ  6-2-2018

                                                          SAMAJ  6-2-2018

Wednesday, 25 October 2017

Wednesday, 27 September 2017

गौहत्या के आरोप में मारे गए पीडितों के लिए मुआवजा दें : उच्चतम न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को गौरक्षकों के आतंक से निपटने का आदेश देते हुए कहां है कि, सभी राज्य सरकारें १३ अक्टूबर तक प्रत्येक जिले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की तैनाती करे जो गौ हत्या के नाम पर होने वाली हिंसा की रोकथाम के लिए काम करे और उससे जुड़े सभी मामलों की देखरेख करे । न्यायालय ने राज्य सरकारों से गौहत्या के आरोप में मारे गए या मॉब लिंचिंग के शिकार हुए पीड़ितों के लिए मुआवजे की भी व्यवस्था करने को कहा है ।
परंतु अन्य भी कुछ सूत्रोंपर गौर करने की आवश्यकता है :
१. गोरक्षकोंद्वारा होनेवाली हिंसा पर उच्चतम न्यायालय जिस तरह निर्णय ले रही है उसी तरह माननीय न्यायालय ने गोरक्षकों पर होनेवाले आक्रमण रोकने हेतु पुलिस एवं राज्य सरकार को आदेश देने चाहिए एेसी हिन्दुआें की अपेक्षा है ।
२. गोरक्षक भी कर्इ बार अपनी जान जोखिम मे डालकर गोरक्षण का कार्य करते है । बहुत से जगह जहां कानून ने गोवंश की रक्षा करना आवश्यक रहते हुए भी पुलिस वह नही करती वहां गोरक्षक जान पर खेलकर गोरक्षण करते है । उन्हे पुलिस भी सहायता नही करती । गाेरक्षक भी इस देश के नागरीक नहीं है ? क्या उच्चतम न्यायालय गोरक्षकों पर होनेवाले आक्रमणों को रोकने हेतु पुलिस को आदेश देगी ?
३. जिस पध्दती से गौहत्या के आरोप में मारे गए या मॉब लिंचिंग के शिकार हुए पीड़ितों को मुआवजा देने की बात न्यायालय ने कही है उसी तरह आज तक गोरक्षकों की भी हत्याए हुर्इ है तथा गोतस्कर अब सैनिकों पर भी आक्रमण कर उनकी हत्या करते है । इन पिडितों को भी मुआवजा देने का आदेश भी माननीय न्यायालय ने देना चाहिए एेसी हिन्दुआें की अपेक्षा है ।